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RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 04-04-2015

अध्याय - ८


जब कोमल ने अपनी गाड़ी घर के सामने खड़ी की तो उसे यह देखकर अचरज हुआ कि सजल शाहीन के घर से निकल रहा था।

“सजल! तुम उस औरत के घर में क्या कर रहे थे?” कोमल ने गुस्से से पूछा।

“उनसे एक बोतल नहीं खुल रही थी इसीलिये मुझे बुलाया था।” सजल ने हकलाते हुए जवाब दिया।

एक बार तो कोमल ने इस जवाब को स्वीकार कर लिया। “आगे से मैं तुम्हे उस कुत्तिया के पास नहीं देखना चाहुँगी... उसे अपने लिये ऐसा मर्द ढूँढ लेना चाहिये जो उसकी बोतल को खोल सके... यह हमारी गलती नहीं है कि उसका पति उसे छोड़कर भाग गया है।”

“अरे मम्मी, वो कोई बुरी औरत नहीं है” सजल ने अपने द्वारा चुदी औरत का पक्ष लेते हुए कहा।

इससे तो कोमल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। “अब मुझसे यह मत कहना कि तुम उस कुत्तिया को पसंद करने लगे हो... तुम उसके हाथों बेवकूफ मत बनना... मुझे उस पर रत्ती भर का विश्वास नहीं है और मैं हम में से किसी को भी उसके नज़दीक नहीं जाने दुँगी।”

घर के अंदर जाते हुए सजल अपना पूरा बचाव कर रहा था। “आखिर तुम्हें शाहीन आँटी में क्या बुराई नज़र आती है? मुझे तो वो एक ठीक औरत लगी।”

इसका जवाब देने के लिये कोमल बगलें झाँकने लगी। उसके जवाब से सजल को इतना तो समझ आ गया कि यह नारी-सुलभ-ईर्ष्या का ही नतीज़ा है।

सजल के मुँह से निकल गया, “तुम सिर्फ़ जलती हो, मम्मी!”

कोमल के सनसनाते हुए चांटे ने सजल के होश गंवा दिये। पर कोमल को अपनी गलती का तुरंत ही एहसास हो गया। कोमल ने सजल को अपनी बाहों में लेकर प्यार करना चाहा पर सजल ने उसे अलग कर दिया। न केवल सजल अपनी मम्मी से इस झापड़ के लिये नाराज़ था बल्कि वह इस बात से भी अनभिज्ञ नहीं था कि उसके जिस्म से शाहीन की चुदाई की खुशबू आ रही थी।

“छोड़ो मम्मी, मैं नहाने जा रहा हूँ।”

“सजल!” कोमल ने आवाज़ दी पर सजल उसे पीछे छोड़कर निकल गया।

पर कोमल को इस बात से भी तकलीफ थी कि उसका परिवार जो शाहीन से अभी तक दूरी रखे था अचानक क्यों उसका खैरगार हो गया था। जब इसका संभावित उत्तर कोमल के ज़हन में आया तो उसे पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। क्या वह शाहीन को भी चोद रहा था, जबकि उसे घर पर ही चूत उपलब्ध थी?

“वो कुतिया!” कोमल ने फुँफकार मारी। उसे विश्वास हो गया कि सजल ने शाहीन को चोद दिया था। अपनी मम्मी को चोदने से उसे अपने से बड़ी औरत का चस्का लग गया था। शाहीन ने इसी का फायदा उठाया होगा।

“सजल!” कोमल की आवाज़ से घर गूँज उठी। वो बिना सोचे अपने लड़के के स्नानघर में घुस गयी। सजल नहा कर बाहर निकल रहा था। उसके मस्त लंड पर एक हसरत भरी नज़र डालते हुए कोमल ने कहा, “कुछ कपड़े पहन लो, तुम मेरे साथ उस औरत के घर चल रहे हो... मैं जान गयी हूँ कि तुम वहाँ पर क्या कर रहे थे और मैं उससे इस बारे में बात करना चाहती हूँ।”

“पर मम्मी, मैंने तुम्हे बताया न कि मैं वहाँ सिर्फ एक बोतल खोलने गया था।”

“बकवास! तुम्हारे चेहरे पर अभी तक चुदाई की चमक है!” कोमल गुस्से से कांप रही थी। उस कुत्तिया के साथ वह अपने बेटे के लौड़े को बाँटने के लिये हरगिज़ तैयार नहीं थी। “मैं तुम्हें दोषी नहीं ठहरा रही हूँ, पर उस रंडी को तो मैं छोड़ुँगी नहीं... जल्दी तैयार हो जाओ।”

सजल जब कपड़े पहन कर अपनी माँ के पास नीचे आया तो उसने बात संभालने की फिर कोशिश की। पर कोमल ने उसकी एक न सुनी।

“कुछ बोलने की कोशिश मत करो... मैं सीधे उसके घर जा रही हूँ... और अगर तुम चाहते हो कि मैं उसकी गर्दन न मरोड़ूँ तो बेहतर होगा कि तुम मेरे साथ ही चलो।”

कोमल ने जाकर शाहीन का दरवाज़ा जोर-जोर से पीटना शुरू कर दिया। जब शाहीन ने दरवाज़ा खोला तो यह ज़ाहिर था कि उसने जल्दी में ऐसे ही नहाने का गाऊन पहन लिया था। इससे कोमल को लगा जैसे वो अभी नहा कर निकली है।

“अच्छा, शाहीन, क्या तुम्हें इस वक्त नहाने की ज़रूरत इसीलिये पड़ गयी क्योंकि तुम मेरे बेटे सजल को चोदकर गर्मी और पसीने से नहा गयी थी? सजल अंदर आओ और दरवाज़ा बंद कर दो।”

शाहीन को बहुत जोर का झटका लगा। उसने कहा, “तुम अपने आप को क्या समझती हो जो मेरे घर में इस तरह से घुसी आ रही हो?”

कोमल उसकी बात को नज़रंदाज़ करते हुए उसके ड्राइंग रूम में प्रवेश कर गयी। उसने अपनी कमर पर हाथ रखकर तैश में अपनी पडोसन से कहा, “तुम भली-भांति जानती हो कि मैं यहाँ क्यों आई हूँ... तुमने मेरे भोले-भाले बेटे को यहाँ बुलाया और उसे बहलाकर अपनी वासना का शिकार बनाया... क्या तुम इससे इंकार करती हो?”

कोमल को उम्मीद थी कि शाहीन इससे मुकरने की कोशिश करेगी। पर उसने शाहीन की बेशर्मी को कम आँका था।

“इसमे क्या गलत है कि तुम्हारे बेटे को मेरे साथ सही तरह का तजुर्बा हो गया? अगर वो किसी ऐसी अन्जान लड़की के साथ कार की पिछली सीट पर यह सब करता जिसे इतनी भी समझ नहीं होती कि ऐसे शानदार लौड़े के साथ क्या करना है, तो क्या तुम्हें खुशी होती?”



RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 04-04-2015

इस जवाब से कोमल निरुत्तर हो गयी। उसने कहा, “इससे तुम्हारे कुकर्म को सही नहीं ठहराया जा सकता। तुमने उसका फायदा उठाया है, और तुम यह बात जानती हो। इसके लिये तो कोई कानून होना चाहिये जिससे कि बड़ी उम्र की औरतें छोटे लड़कों को बहका न सकें।”

सजल अपनी मम्मी के इस ढोंग से अब काफी क्रोधित हो चला था। उससे रहा नहीं गया और वह बोल पड़ा, “तुम यह सब बातें शाहीन आँटी को कैसे कह सकती हो मम्मी... जबकि तुम भी मुझसे चुदवाती हो?” कहने को तो वह कह गया पर उसे उसी वक्त यह समझ आ गया कि उससे एक भीषण गलती हो गयी है।

“सजल!” कोमल सकते में आ गयी। पर वह जान गयी थी कि अब गोली बहुत दूर जा चुकी है। उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि वह सजल का हाथ पकड़े और भाग जाये।

कुछ सन्नाटे के बाद शाहीन बेहताशा हँसने लगी। “तो ये बात है... तुम जल रही हो... तुम्हारी इतनी हिम्मत कि यहाँ आकर मुझे नसीहत दो जबकि तुम खुद अपने बेटे को चोद रही हो? लोगों को क्या ज्यादा बुरा लगेगा? मेरा सजल को चोदना या तुम्हारा?”

“हम घर जा रहे हैं...” कोमल बोली।

“नहीं, तुम कहीं नहीं जा रही हो... जब तुम यहाँ आई हो तो मेरी भी सुनती जाओ... तुमने सालों से मुझे कचरे की तरह समझा है, जबसे मेरा शौहर मुझे छोड़कर चला गया... तुम्हें हमेशा यह डर रहा कि मैं तुम्हारे शौहर को न चोदूँ... मैं तुम्हें एक अच्छी खबर देना चाहती हूँ... न सिर्फ मैंने सजल को चोदा है बल्कि मैं सुनील को भी चोद चुकी हूँ... क्या तुम्हें इस बारे में कुछ कहना है?”

“हरामजादी!” कोमल ने गुस्से से हाथ घुमाया, पर सजल ने अपनी फुर्ती दिखाई और उसे बीच में ही पकड़ लिया।

“अब इतनी भोली न बनो, कोमल...” शाहीन ने व्यंग्य किया, “तुम जो सजल को चोदती हो, और उस दिन तुम्हारे घर से सजल के कॉलेज का प्रिन्सिपल जो जा रहा था?”

“वो तो सजल से मिलने आया था, हमारे बीच में कुछ नहीं हुआ।”

पर सजल की शक भरी निगाहें उसे भेद रही थीं। “तुमने मुझे बताया नहीं कि कर्नल मान आये थे?” सजल ने पूछा।

“इसीलिये नहीं बताया क्योंकि इसने उसे चोदा था, सजल...” शाहीन ने मुस्कराते हुए कहा, “मुझे पता है क्योंकि उस दिन ये परदे डालना भूल गयी थी और मैने पूरी चुदाई इन आँखों से देखी थी।”

कोमल को यह पता नहीं था कि शाहीन ने कुछ देखा नहीं था, पर अंधेरे में तीर मार रही थी। पर शाहीन ने बात कुछ इस अंदाज़ में कही थी जैसे कि वह सच ही बोल रही हो। शाहीन ने अब अपने वार को और तीखा करने की ठानी। उसने अपने नहाने वाले गाऊन का नाड़ा खोल उसे उतार फैंका और अब वो सिर्फ सैंडल पहने उसी अवस्था में आ गयी जिस अवस्था में थोड़ी देर पहले सजल ने उसे चोदा था। उसका नंगा तन चमकने लगा।

“मुझे हैरत है कि सजल मुझे चोदने के लिये क्यों आया?। क्या वो तुम्हें चोदने से ऊब गया है?” उसने अपने शरीर को सजल के जिस्म से रगड़ते हुए कहा।

वो दोनों मम्मी-बेटे कुछ कहने की हालत में नहीं थे।

शाहीन ने कोमल को और छेड़ते हुए इठलाते हुए कहा, “अब तुम समझ सकती हो कि सजल और सुनील दोनों को मेरे पास आने की ज़रूरत क्यों पड़ी... मेरे पास वो सब कुछ है जिसकी उन्हे ख्वाहिश है... बड़े मम्मे और एक तंग गाँड.... अब जब तुम यहीं हो सजल तो क्यों न हम उस काम को अंजाम दें जो हमने शुरू कर दिया है? मेरे ख्याल से तुम्हारी मम्मी यह जानने को बेकरार होगी कि मैं कैसे चुदवाती हूँ।”

सजल अपनी मम्मी से नाराज़ अवश्य था पर वह उसके अपमान में शाहीन का साथ देने को तैयार नहीं था। उसने शाहीन को दूर धकेलने की कोशिश की पर इतने में ही उसकी मम्मी की एक हरकत पर वह ठगा सा रह गया।

“तुम अपने आप को बड़ा गर्म और सैक्सी समझती हो न शाहीन? मैंने तुम्हें अपने शरीर की नुमाइश करते हुए कई बार देखा है... पर अब मैं तुम्हे बताती हूँ कि सजल और सुनील क्यों हमेशा मेरे पास ही वापस आयेंगे।”

शाहीन को भी गहरा आश्चर्य हुआ जब उसकी पडोसन ने अपने कपड़े उतारने आरंभ किये। उसने भी यह माना कि कोमल के पास अत्यंत ही लुभावना और आकर्षक जिस्म था। कोमल ने नंगे होने में अधिक देर नहीं लगायी। वो सिर्फ अपनी बात सिद्ध करना चाहती, किसी पर विजय नहीं।

“किसका शरीर ज्यादा सुंदर है, सजल?” उसने शाहीन की तारीफ भरी नज़रों में नज़रें डालकर सजल से पूछा।

सजल को अपनी यह स्थिति पसंद नहीं आ रही थी। अपनी कम उम्र के बावजूद वह समझ गया था कि इन दोनों औरतों की लड़ाई बंद करानी होगी।

“आप दोनों रुकिये... आप पर जो पागलपन सवार हो रहा है उसे रोकिये... आप लोग इतने सालों से पडोसी हैं पर एक दूसरे के बारे में आपके खयालात कितने गलत हैं।”

वो दोनों सजल की बात सुन रही थीं। उन्हे इस बात से थोड़ी संतुष्टि हुई कि सजल ने स्थिति पर काबू कर लिया था।

सजल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “मैं इस बात का कोई वोट नहीं डालुँगा कि आप दोनों में से किसका जिस्म ज्यादा सुंदर है... जहाँ तक मेरा ताल्लुक है, मुझे इससे कोई सरोकार नहीं है... आप दोनों बेहद सैक्सी औरतें हैं... बस!” यह कहते-कहते सजल ने अपने लंड को खड़ा होते महसूस किया। उसकी दोनों विजय-पताकाओं के बीच में रहने से उसका झंडा बिना खड़े हुए न रह सका। सजल ने अपनी बाँह अपनी मम्मी की कमर में डाली, उसने शाहीन के साथ भी ऐसा ही किया।



RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 04-04-2015

“मैं हमेशा सोचा करता था कि दो औरतों को एक साथ चोदने में कैसा लगेगा... क्या आप दोनों अपनी लड़ाई छोड़कर मुझे यह बात समझायेंगी?” बिना उनके उत्तर का इंतज़ार किये, उसने अपने वस्त्र उतारने शुरू कर दिये।

उसका हौंसला इस बात से भी बढ़ा कि उन दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। उनकी चुप्पी ने उसे यह समझा दिया कि वो उससे सहमत हैं।

“तुम्हें शाहीन आँटी से जलन नहीं होनी चाहिये मम्मी...! अगर मैं इन्हें चोदता हूँ तो इसका यह अर्थ नहीं कि मैं आपको चोदना बंद कर दुँगा।” सजल एक हाथ से अपनी मम्मी और दूसरे हाथ से शाहीन के मम्मों को दबाते हुए बोला।

कोमल ने सजल को शाहीन के मोटे मम्मों से खेलते हुए देखा। उसे ईर्ष्या की जगह एक अभूतपूर्व रोमाँच का एहसास हुआ।

सजल ने अपनी मम्मी से कहा, “मम्मी मैं आप दोनों को चोदना चाहता हूँ।” यह कहकर उसने अपनी मम्मी का एक प्रगाढ़ चुम्बन लिया। उसका दूसरा हाथ कोमल की गाँड दबाने लगा।

शाहीन जान गयी कि आज की दोपहर निराली होगी। उसने अपने स्तन सजल की पीठ पर लगा दिये। उसने अपना हाथ मम्मी-बेटे के बीच से सजल के लंड पर पहुँचा दिया और उसे दबाने लगी। कोमल उसके हाथ को हटाने की कोशिश करने लगी। पर फिर उसने अपने बेटे के शानदार लंड को इस औरत के साथ बाँटने का निर्णय लिया।

सजल ने अपने आप को वहीं कारपेट पर लिटा लिया और अपनी मम्मी को अपने ऊपर इस तरह खींचा कि उसकी चूत उसके मुँह पर आ लगी। उसने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसेड़ दी। अब वह इस बात का इंतज़ार कर रहा था कि शाहीन उसका लंड चूसने लगेगी।

शाहीन के चेहरे पर मुस्कराहट फैल गयी। उसने झुककर उस झुलते हुए लंड को अपने हाथ में लिया और झट से मुँह में भर लिया।

“इसका लंड बहुत लज़ीज़ है, कोमल।” उसने कोमल को हिम्मत देते हुए कहा।

इससे कोमल का यह डर कि वह उसके लड़के को काबू में ले लेगी शाँत हो गया।

कोमल ने भी देखा कि शाहीन सजल के लंड से जलपान कर रही थी। हालांकि वो इस दृश्य को देखना चाहती थी पर उसकी चूत में छाये तूफान पर उसका बस नहीं था।

“मुझे ज़रा मुड़ने दो सजल,” कह कर कोमल तेजी से घूम गयी जिससे उसका मुँह शाहीन की ओर हो गया। “अब मेरी चूत चाटो सजल।”

उसने अपना चेहरा नीचे झुकाया जिससे उसका सिर शाहीन के सिर से जा टकराया। कोमल भी उस लंड का स्वाद लेना चाहती थी। शाहीन ने भी दरियादिली दिखाई और अपने मुँह से उस चिपचिपाते लंड को निकालकर कोमल के मुँह की ओर कर दिया।

“इसका ज़ायका लो कोमल, तब तक मैं इन टट्टों का ज़ायका लेती हूँ।”

कोमल ने अपनी जीभ सजल के लंड के सुपाड़े पर फिराई और फिर धीरे से उसे अपने मुँह में भर लिया। इस समय उसे खाने और खिलाने का दोहरा मज़ा आ रहा था।

सजल उन दोनों सुंदरियों की जिव्हाओं के आघात से तड़प रहा था। उसकी तमन्ना पूरी हो गयी थी। पर उसका अपने ऊपर काबू खत्म हो गया था। कुछ ही मिनटों की चुसाई और चटाई से उसके लंड ने पिचकारी छोड़ दी।

कोमल ने अपने मुँह मे छुटते हुए रस को पीना शुरू कर दिया। शाहीन ने कोमल को हटाने के उद्देश्य से उसके मम्मों को पकड़कर धक्का सा दिया। पर कोमल इसका कुछ और ही अर्थ समझी।

“और जोर से भींचो इन्हें शाहीन! और तुम मुझे खाओ सजल।” यह कहते समय उसे भी शिखर प्राप्ति हो गयी।

शाहीन उन दोनों को झड़ते हुए बस देखती ही रह गयी। उसे यकीन था कि इंतज़ार का फल मीठा होगा पर उसको मम्मी-बेटे के प्यार की गहराई का अनुभव जरूर हो गया था।

जब कोमल झड़कर शाँत हुई तो शाहीन उसकी ओर देखकर बोली, “मैं तुम्हारे मम्मों को तुमसे पूछे बिना नहीं दबाना चाहती थी। शायद तुम्हे ये पसंद न आया हो।”

“कोई बात नहीं, शाहीन, मुझे वाकय अच्छा लगा था। मैं हमेशा अचरज करती थी कि दूसरी औरत के साथ यह सब करना कैसा लगेगा।” उसने शाहीन के तने हुए मम्मों पर आँखें जमाते हुए जवाब दिया।

“हम दोनों भी नमूने हैं, कोमल! कुछ देर पहले हम एक दूसरे की जान लेने पर आमादा थे और अब माशुका बनने की बात कर रहे हैं...” दोनों औरतें साथ-साथ हंसने लगीं।

“शायद मैं तुमसे इसीलिये दूर रहना चाहती थी... मुझे डर था कि मैं कहीं तुम्हारे साथ संबंध ना बना लूँ...” कोमल बोली।

सजल का लंड सामने के दृश्य को देखकर फिर से तनतना गया था। उसने अपने सामने नाचते हुई अपनी मम्मी की गाँड देखी तो वो उसके पीछे झुका और अपना दुखता हुआ लौड़ा अपनी मम्मी की चूत में पेलने लगा।

“नहीं सजल,” कोमल ने अपनी चूत से उसका लंड बाहर निकालते हुए कहा, “मैं तुम्हे शाहीन को चोदते हुए देखना चाहती हूँ... उसके पीछे जाओ और उसे चोदो... जाओ!”

सजल का लंड इस समय इतना अधिक दुख रहा था कि उसे इस बात से कतई मतलब नहीं था कि उन दोनों में से किसे उसके मोटे लंड का आनंद मिलेगा। उसने शाहीन के चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ा और अपना लंबा लंड जड़ तक, एक ही धक्के में ठोक दिया। शाहीन की गिलियाई हुई चूत ने भी आसानी से पूरे मूसल को अपने अंदर समा लिया। हालांकि शाहीन अभी ही झड़ के निपटी थी, पर वो एक बार फिर तैयार थी।

“शुक्रिया, कोमल, जो तुमने मुझे इसे चोदने दिया... मुझे खुशी है कि अब तुम सारी बात को समझती हो... मैं इतनी अकेली थी, इतनी चुदासी... मुझे इसके लंड की सख्त जरूरत थी।”

कोमल की चूत में भी आग बदस्तूर लगी हुई थी। उसने अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य तो निभा दिया था पर वो इंतज़ार कर रही थी कि सजल शाहीन को निपटाकर उसकी चूत की प्यास बुझाये। कुछ ही देर की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद सजल के झड़ने की बारी आखिर आ ही गयी।

“मैं झड़ रहा हूँ, मम्मी!” सजल चीखा और अपना रस शाहीन की चूत में भरना शुरू कर दिया।

कोमल अपने सामने का दृश्य देखकर ही झड़ गयी। शाहीन आखिर में झड़ी। मम्मी-बेटे के बीच में सैंडविच की तरह चुदने का आनंद अपरंपार था।

“मेरे साथ झड़ो, तुम दोनों! दोनों! सजल! कोमल! मैं तुम्हारी चूत के ज़ायके से प्यार करती हूँ... मैं तुम्हारी घनघोर चुदाई से भी प्यार करती हूँ, सजल! चोदो मुझे! चो...दो! मैं झड़ी रे! हाय रे! मैं मरी!”

जब सब शाँत हुए तो शाहीन को ऐसा महसूस हुआ जैसे कि वो भी सिंह परिवार का हिस्सा हो गयी हो।



RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 04-04-2015

कहानी अभी बाकी है दोस्तों....


RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 05-04-2015

अध्याय - ९

सुनील एक बड़ा खतरा उठाने के बारे में सोच रहा था। ये पागलपन था और ये उसे भी पता था, पर वो कुछ रोमाँचक करने के मूड में था। उसने अपना गोल्फ का खेल खत्म ही किया था और उसका ग्राहक मित्र राकेश उसे घर छोड़ने जा रहा था। उसने अगली सीट पर बैठे हुए अपने शरीर को मोड़ा जब उसने अपने लंड को खड़ा होते हुए महसूस किया। उसका लंड शाहीन को चोदने के ख्याल से सख्त हो रहा था। उस सुंदर चुदक्कड़ औरत को चोदने के बारे में सोचने के कारण आज उसका खेल बहुत बेकार रहा था। राकेश की गाड़ी से उतरकर सीधा शाहीन के घर घुसने में खतरा था और कोमल घर पर थी तो ये खतरा और भी बड़ जाता था। वो अपने खेल का सामान शाहीन के घर ले जायेगा और वहाँ से अपने घर चला जायेगा और ऐसे दिखायेगा जैसे वो खेल कर लौटा है। सुनील ने ये सोचते हुए अपने दुखते हुए लंड को एडजस्ट किया और शाहीन की रसीली चूत में डालने का इंतज़ार करने लगा।

उधर कोमल, शाहीन और सजल ड्राईंग रूम में बैठ कर बातें कर रहे थे। अब उनमें किसी तरह का मलाल नहीं था। हँसना और मज़ाक करना भी अब आसान था, चूंकि पिछले कुछ घंटों में वो काफी करीब आ चुके थे। तीनों नंगे ही बैठे थे।

“तुम दोनों रुक कर मेरे साथ खाना खा कर क्यों नहीं जाते... मेरे पास एक मोटा मुर्गा है जो मैं अकेले तो बिल्कुल नहीं खा पाऊँगी”, शाहीन बोली।

“धन्यवाद! आज इतना कुछ होने के बाद मैं अब घर जाकर खाना बनाने के मूड में भी नहीं हूँ।”

“सुनील का क्या होगा? क्या हम उसे भी खाने के लिये दावत दे दें?” शाहीन ने एक नटखट मुस्कुराहट के साथ पूछा।

कोमल बोली, “मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि मैं सुनील को ये बदला हुआ माहौल कैसे समझा पाऊँगी? मेरी तो हँसी ही निकल जायेगी।”

“तुम क्या सोचती हो कोमल....! क्या ये मुनासिब होगा कि हम उसे बता दें कि तुम सजल से चुदवाती हो?” शाहीन ने पूछा, “उसके लिये शायद ये कबूल करना मुश्किल हो कि उसकी बीवी अपने ही बेटे से चुदवाती है।”

कोमल ने अपने एक मम्मे को खुजलाते हुए कहा, “इतना जो इन कुछ दिनों में हुआ है, उसे देखकर लगता है कि मैं सब कुछ संभाल सकती हूँ, चाहे वो एक बेहद नाराज़ पति क्यों न हो... और फिर उसके पास भी तुम्हें चोदने के बाद ज्यादा बात करने का मुँह नहीं है।”

“हाँ! पर मेरा क्या होगा, मम्मी?” सजल के चेहरे पर गहरी चिंता के भाव थे।

कोमल ने सजल के सिकुड़े हुए लंड को थपथपाते हुए कहा, “अपने पापा को संभालने का काम तुम मुझ पर ही छोड़ दो तो बेहतर है.... मैं अब पीछे हटने वाली नहीं हूँ... उसे या तो सब स्वीकार करना होगा.... या चाहे तो वो तलाक ले सकता है।”

“मम्मी?” सजल अपने मम्मी-पापा के अलग होने की बात से आहत हो गया। “तुम्हारे ख्याल से ऐसा नहीं होगा... है न? मैं आप दोनों के बीच में नहीं आना चाहता...।”

“नहीं.... मेरे ख्याल से ऐसी नौबत नहीं आयेगी... कम से कम तुम से चुदवाने से तो नहीं... इससे हमारी शादी में और दृड़ता आयेगी... तुम्हें सोचकर आश्चर्य होगा पर तुम्हारे पापा ने मुझे एक बार कहा था कि बचपन में उनकी अपनी मम्मी को चोदने की बड़ी हसरत थी।”

“दादी को... पर वो तो... ?” सजल चौंक गया।

कोमल ने उसे झिड़कते हुए कहा, “अरे... वो अब बूढ़ी हुई हैं... पर अपने दिनों में वो बेहद हसीन थी... उस बात को छोड़ो... मेरा मतलब है कि ये कोई नई बात नहीं है कि कोई लड़का अपनी मम्मी को चोदने की इच्छा रखता हो... शायद पापा ये बात तुमसे ज्यादा अच्छे से समझ सकते हैं और इस बात का मुझे विश्वास है।”

उसी समय सामने के दरवाज़े की घंटी बजी। शाहीन घबरा गयी।

“इस समय कौन हो सकता है?”

“हम तुम्हारे अतिथि शयन कक्ष में रहेंगे जब तक कि तुम इस आगंतुक को नहीं निपटा देतीं... सजल! अपने कपड़े उठाओ और मेरे साथ आओ...” कोमल ने कहा।

कोमल और सजल को उस कमरे में गये अभी कुछ ही क्षण हुए थे कि शाहीन घबरायी हुई अपने ऊँची ऐड़ी के सैंडल खटकाती अंदर आयी।

“अरे बाहर तो सुनील है... अब मैं क्या करूँ?”

“रूको!” कोमल ने कहा। उसका दिमाग तेज़ी से एक नतीज़े पर आया। “उसे पता नहीं कि सजल और मैं यहाँ हैं... उसे अंदर आने दो और अपने शयनकक्ष में ले जाओ... शायद सब कुछ ठीक हो रहा है... अगर तुम उसे अपने शयनकक्ष में ले जा कर चोदने में सफल हो जाती हो तो हम बीच में आकर तुम्हें रंगे हाथों पकड़ लेंगे... उसके बाद.... समझीं?”

शाहीन के चेहरे पर रंगत वापस आ गयी। उसे कोमल का प्लान समझ आ गया।

“हम्म्म्म... तब सुनील बहुत ही अजीब सी हालत में होगा... उसे हमारे बारे में कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं होगी... है न?”

“एकदम सही!” कोमल ने एक विषैली मुसकराहट से कहा, “अब जाओ और जैसा मैंने कहा है... वैसा करो... हम यहाँ छुपते हैं... तुम जा कर उसके लंड को अपनी चूत में घुसवाओ...” ऐसा कहकर कोमल ने शाहीन की नंगी गाँड पर प्यार भरी एक चपत लगाई।

कोमल ने एक झिर्री सी रखकर कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया। इसमें से वो बाहर चल रहे प्रोग्राम को देख-सुन सकती थी। उसने सुनील के गोल्फ के सामान की आवाज़ सुनी। कुछ ही देर में उसने शाहीन को अतिथि कक्ष के सामने से सुनील को अपने शयन कक्ष में हाथ पकड़ जाते हुए देखा।

उसने शाहीन की बात सुनी, “मैंने सोचा था कि आज सुबह की चुदाई से तुम्हारा दिल भर गया होगा... तुम्हें कोमल के घर रहते हुए यहाँ आने में कोई खतरा नहीं महसूस हुआ?”

“मेरे ख्याल से उसने राकेश को मुझे छोड़ते हुए नहीं देखा... पर अब इस बात की चिंता करने से कुछ नहीं होगा... मैं अगले हफ्ते काफी व्यस्त हूँ... इसलिए आज कुछ समय तुम्हारे साथ बिता लेता हूँ... सारे समय मैं गोल्फ की जगह तुम्हारे बारे में सोचता रहा...!”

कोमल ने ये सुना तो उसे अपने पति पर गुस्सा आ गया और अब वो उस वक्त का इंतज़ार करने लगी जब वह उन दोनों को रंगे हाथ पकड़ेगी।

उसने सजल की और मुखातिब होकर कहा, “देखना जब हम तुम्हारे पापा को पकड़ेंगे... वो हर बात जो हम कहेंगे... मानेंगे।”

कुछ देर सुनील और शाहीन की चुदाई शुरू होने के बाद वो बोली, “अब और नहीं ठहरा जा रहा... चलो हम हमला बोलते हैं।”



RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 05-04-2015

जब कोमल ने शाहीन के शयनकक्ष में झाँका तो कुछ समय के लिये वो सामने का मंजर देख कर ठिठक गयी। उसने सजल को अपने पास खींचा जिससे कि वो भी देख सके। उसके मन में एक बार ईर्ष्या आ गयी।

“वाह! अपनी चूत को मेरे लंड पर और जोर से दबाओ... शाहीन!” सुनील कह रहा था। उसका मोटा लंड शाहीन की चूत में गढ़ा हुआ था। शाहीन के सैंडल युक्त पाँव छत की ओर थे और सुनील उसे पुराने तरीके से ही ऊपर चढ़कर चोद रहा था। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे।

“मुझे जोर से चोदो सुनील... और जोर से...” शाहीन अब सब भूल कर अपनी चूत का भुर्ता बनवाने में मशगूल थी। उसी समय उसकी नज़र दरवाज़े पर पड़ी और उसके मुँह पर एक शैतानी मुस्कान आ गयी। वहाँ सजल और कोमल उनका ये चुदाई का खेल देख रहे थे। उसने उन दोनों का थोड़ा मनोरंजन करने की ठानी। “जोर से चोदो मुझे सुनील... बिल्कुल रहम मत करो... फाड़ दो मेरी चूत को अपने मोटे लौड़े से...” ये कहकर शाहीन ने सुनील की गाँड भींचते हुए उसकी गाँड में एक अँगुली घुसा दी।

“हरामजादी!” सुनील के मुँह से गाली निकली। “अगर ऐसा किया तो मैं झड़ जाऊँगा...!”

कोमल के संयम का बाँध टूट गया। हालांकि देखने में बहुत मज़ा आने लगा था, पर वो अपने हाँफते और काँपते पति को रंगे हाथों पकड़ने का मौका नहीं छोड़ना चाहती थी।

“क्या हुआ सुनील...? घर पर मेरी चूत चोदकर मन नहीं भरता क्या?” कोमल ने अंदर घुसकर बिस्तर की ओर कदम बढ़ाते हुए सवाल किया। उसकी आवाज़ माहौल के विपरीत काफी शाँत स्वर में थी।

कोमल की आवाज़ सुन कर, सुनील को काटो तो खून नहीं। उसका जिस्म जैसे जड़ हो गया और धक्के बंद हो गये। उसका मुँह खुला का खुला रह गया जब उसने अपनी पत्नी और बेटे, दोनों को वहाँ नंगा खड़ा देखा। उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। शायद ये कोई सपना ही था।

“तुम्हें शायद मुझे देख कर आश्चर्य हो रहा है... प्रिय पति महाराज!” कोमल मुस्करायी और बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गयी। सजल को अपने पापा से डर लग रहा था और वो अपनी मम्मी के दो-तीन फीट पीछे ही खड़ा रहा। “पर आश्चर्य तो मुझे होना चाहिये... है न? ये देखकर कि तुम मेरी पीठ पीछे क्या गुल खिला रहे हो।”

सुनील ने शाहीन की चूत से अपना तना हुआ लौड़ा बाहर खींच लिया। उसने बिस्तर पर बैठ कर कुछ समय सोचकर अपनी आवाज़ को पाया। “पर तुम यहाँ पर क्या कर रही हो कोमल? और वो भी सजल के साथ? और फिर तुम दोनों नंगे क्यों हो?” वो अपनी आवाज़ में कठोरता पैदा करने की असफल कोशिश कर रहा था।

“मेरे साथ ज्यादा होशियार बनने की कोशिश मत करो...” कोमल उसे ऐसे नहीं बक्शने वाली थी, न वो अपने ऊपर कोई बात लेने वाली थी। सुनील उस समय उसी परिस्थिति में था जैसा वो उसे चाहती थी। “वो तुम हो जो गलत चूत में अपने लंड के साथ पकड़े गये हो... मैं नहीं!”

“ठीक है कि मैं पकड़ा गया हूँ और मेरे पास कोई सफाई भी नहीं है... पर सजल तुम्हारे साथ यहाँ क्यों आया है और तुम दोनों नंगे क्यों हो?” सुनील ने अपने नंगे बेटे की ओर देखते हुए पूछा। सजल का लंड इस समय खड़ा था।

“ये मत समझो कि सजल ये सब देखने समझने के लिये बड़ा नादान है... सजल! इधर आओ...” जब सजल अपनी जगह से हिला भी नहीं तो कोमल ने दोबारा कहा, “सजल, इधर आओ... तुम्हारे पापा तुम्हें छुयेंगे भी नहीं... ये मेरा वादा है।”

सजल धीमे कदमों से अपनी मम्मी के साथ आ कर खड़ा हो गया पर उसकी सहमी नज़र अपने पापा के चेहरे पर ही रही। कोमल ने शाहीन की और आश्वासन के लिये देखा। उसकी नई सहेली ने गर्दन हिलाकर अपना समर्थन दिया।

“तुम्हें याद है सुनील... जब तुमने मुझे अपनी मम्मी को चोदने की इच्छा के बारे में मुझे बताया था?” कोमल ने सँयत शब्दों में भूमिका बाँधी।

“कोमल!” सुनील चिल्लाया, “तुम ऐसे समय वो बात यहाँ कैसे कर सकती हो? मैंने तुम्हें वो बात दुनिया को बताने के लिये थोड़े ही बताई थी।”

कोमल ने अपना हाथ उठाकर उसे शाँत रहने का इशारा किया। उसने सजल की ओर अपना हाथ बढ़ाया और उसे अपनी और खींचा।

“मैं सिर्फ तुम्हें उस समय की याद दिला रही थी जब तुम सजल की उम्र के थे... इससे तुम्हें वो समझने में आसानी होगी जो मैं तुम्हें बताने वाली हूँ।” कोमल ने एक गहरी साँस भरी और अपने स्वर को संयत किया, “मैं सजल से उसकी छुट्टियों के कुछ समय पहले से चुदवा रही हूँ।”

कमरे में एक शाँती छा गयी। अगर सुंई भी गिरती तो आवाज़ आती।

फिर सुनील ने हिराकत भरे स्वर में कहा, “कितनी घृणा की बात है ये... तुम अपने बेटे से कैसे...?”

शाहीन, कोमल का साथ देने के लिये, सुनील की बात काटते हुए बोली, “अब ऐसे शरीफ़ मत बनो तुम सुनील... तुम भी कोई बड़े शरीफ़ इंसान नहीं हो... अगर कोमल को तुम घर में उसके मन मुताबिक चोदते रहते तो वो क्यों सजल की ओर जाती? हो सकता है कि शायद वो फिर भी सजल से चुदवाती ही, कौन कह सकता है। अगर मेरा सजल जैसा बेटा होता तो मैं तो उसको जरूर चोदती।”

“पर मुझे यह मंजूर नहीं...” सुनील बोला।

“बकवास...!” शाहीन ने जवाब दिया। “तुम्हारे पास कोई चारा भी नहीं है सुनील! कोमल माफी नहीं माँग रही है... वो तुम्हें बता रही है कि या तो तुम इसे कबूल करो या...” शाहीन ने अपने शब्द अधूरे छोड़कर अर्थ साफ कर दिया।

“अरे ये सब बेकार की बातें छोड़ो...! हम सब चुदासे हैं और एक दूसरे की चुदाई छोड़कर क्या गलत, क्या सही की बातें चोदने में लगे हैं... इधर आओ सुनील और मुझे चोदो... जो तुम कह रहे थे... अपने लौड़े को देखो, ये अब पहले से भी ज्यादा तना हुआ है... मैंने इतना सख्त पहले इसे नहीं देखा।” ये कहते हुए शाहीन ने अपने हाथों से सुनील का विशाल मोटा लंड ले लिया और उसे सहलाने लगी। “इसे यूँ ही चलने दो सुनील! कोमल और मेरे पास तुम्हारे लिये बहुत कुछ खास है।”



RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 05-04-2015

ये कहकर शाहीन ने सुनील का हलब्बी लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। कोमल ने भी अपना तीर फेंका। उसने बिस्तर पर झुकते हुए अपनी बाँहें उसकी गर्दन में डाल दीं। उसके विशाल मम्मे अब सुनील के चेहरे के पास थे।

“बोलो मत सुनील... मेरे मम्मों को चूसो। शाहीन को अपना लंड चूसने दो... हम दोनों को तुम्हें चोदने चाटने दो.... मेरी जान! अब चीज़ें दूसरे नज़रिये से देखो... अब तुम्हें छुपकर अपने पड़ोस में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तुम्हारी जब इच्छा हो, हम दोनों तुमसे चुदवाने के लिये तैयार रहेंगी।”

सुनील अपने दोनों ओर फैले हुए नंगे गर्म जिस्मों में खो गया। कोमल ने अपने मम्मों को उसके मुँह में डाल दिया। सुनील इतना ताकतवर था कि इन दोनों औरतों को परे धकेल सकता था, पर उसने ऐसा किया नहीं। उसे दोगुने आनंद की प्राप्ति हो रही थी।

“ठीक है... मैं हार मानता हूँ।” सुनील ने अपना मुँह कोमल के मम्मों से हटाते हुए कहा, “हम बाद में बात करेंगे... पर मुझे अभी भी सजल और तुम्हारे बीच का... ”

“अपना मुँह बंद रखो, सुनील... अगर खोलना है तो मेरे मम्मों को चूसने के लिये... हाँ अब ठीक है... जोर से चूसो...!”

“अब ये सब बहुत हो चुका...” शाहीन सुनील के लंड की चुसाई रोकती हुई बोली, “अब मुझे इस मोटे लंड से अपनी चूत चुदवानी है... इस पूरे सीन से मेरी चुदास बेइंतहा बढ़ गयी है... अरे सुनील तुम्हारा लंड तो जबर्दस्त फूल गया है... हम्म्म... अब ये मत कहना कि तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा।” ये कहकर शाहीन ने पूरा लौड़ा एक ही झटके में अपनी चूत में पेल डाला।

अब चूंकि सुनील का लंड एक समय में एक ही चूत चोद सकता था, कोमल को अपनी प्यासी चूत के लिये कोई दूसरा इंतज़ाम करना लाज़मी हो गया।

वो बिस्तर से खड़ी हो गयी और अपने बेटे से बोली, “ज़मीन पर लेटो सजल... मैं तुम्हें वैसे ही चोदना चाहती हूँ, जैसे शाहीन तुम्हारे पापा को चोद रही है।”

सजल की हिम्मत अब धीरे-धीरे वापिस आ रही थी। अब जब उसने अपने पापा को चुसाई और चुदाई में मशगूल देखा तो वो जाकर ज़मीन पर चौड़ा हो कर अपनी पीठ के बल लेट गया और अपनी चुदासी मम्मी का अपने तैनात लौड़े की सवारी के लिये इंतज़ार करने लगा। सुनील स्तब्ध होकर अपनी पत्नी को अपने बेटे के तनतनाये हुए लंड पर सवार होते हुए देख रहा था। उसने कोमल को सजल से चुदवाने से रोकने के लिये एक शब्द भी नहीं कहा। इस समय वो इतना रोमाँचित था कि उसके लिये ऐसा करना संभव ही नहीं था। नाराज़गी की जगह उसके मन में विस्मय अधिक था।

“ये मेरे लिये ही खड़ा है न, बेटे?” कोमल ने अपनी गर्म प्यासी चूत को सजल के लंड पर सरकाते हुए सरगोशी की। उसने सजल के लंड को पकड़ कर अपनी चूत को उस पर आहिस्ता से उतार दिया। “मुझे तुम्हारा लंड अपनी चूत में फुदकता हुआ लग रहा है... मॉय डार्लिंग।”

सजल ने अपने हाथ बढ़ाकर अपनी मम्मी के फुदकते हुए मम्मों को पकड़ लिया। कोमल की गर्म चूत अब उसके गर्माये हुए लंड पर नाच रही थी। उसने अपने पापा की ओर देखा तो वो इस नज़ारे से बहुत मज़ा लेते हुए लगे।

“है न देखने लायक सीन, सुनील?” शाहीन ने अपने विशाल मम्मों को पकड़कर सुनील के लंड पर अपनी चूत सरकाते हुए पुछा। “तुमने सोचा भी न था कि ये देखकर तुम्हें इतना मज़ा आयेगा।”

कोमल ने अपना सिर घुमा कर अपने पति की आँखों में देखा। “देखो... कितना बढ़िया है ये सब। अब तुम्हें ये बुरा नहीं लग रहा होगा... है न मेरी जान? ज़रा सोचो तो कि अब हम लोग क्या और कर सकते हैं... सजल को चोदते हुए देखो सुनील! देखो मैं अपने बेटे को कितना सुख दे रही हूँ।”

“मेरे मम्मों को और जोर से दबाओ सजल! और मुझे जोर से नीचे से झटके मार कर चोदो।” उसकी चूत को अब तेज़ और दम्दार चुदाई की इच्छा थी।

सुनील शाहीन की गर्म चूत की भट्टी में अपने लंड से पूरे ज़ोर से चुदाई कर रहा था। उसने शाहीन की दोनों गोलाइयों को अपने हाथों से पकड़ रखा था और दबा रहा था। पर उसकी नज़रें पूरे समय अपनी पत्नी और बेटे की चुदाई पर टिकी हुई थीं। अब उसे कोई जलन नहीं थी। उसने उस उम्र को याद किया जब वो सजल की उम्र का था। उसके मन में भी अपनी माँ को चोदने की बड़ी इच्छा थी। आज वो अपनी उस हसरत को अपने बेटे सजल के रूप में पूरी होते देख रहा था।

उसने शाहीन की चुदाई की रफ्तार बड़ाते हुए आवाज़ दी, “चोदो उसे कोमल...” ये कहकर उसने अपना रस शाहीन की प्यासी चूत में भर दिया।

कोमल ने अपने झड़ते हुए पति को शाबाशी दी, “भर दो उसकी चूत को सुनील... आज हम रात भर चुदाई करेंगे।”

कोमल और सजल को चोदते देखना ही शाहीन के लिये काफी था पर अपनी चूत में सुनील के रस के फुहारे से तो वो बेकाबू हो गयी। “कोमल मुझे देखो... मैं तुम्हारे शौहर को चोद रही हूँ.... मैं उसके साथ झड़ रही हूँ... आआआआआआआआ आआआआआआआ ईईईईईईईईईई ईईईईईईईईईईईईईई!”

सुनील और शाहीन थोड़ी देर के लिये शाँत हो गये और दोनों माँ बेटे का खेल देखने लगे।

“जल्दी करो तुम दोनों, सजल भर दे अपनी माँ की चूत...” शाहीन ने उन्हें बढ़ावा दिया।

सुनील को अपनी आवाज़ सुनकर आश्चर्य हुआ, “चोद उसकी चूत को जोर से, सजल!”



RE: घरेलू चुदाई समारोह - Rohitkapoor - 05-04-2015

कोमल ने भी अपने पति की बात सुनी। उसे खुशी हुई कि सुनील ने सब कुछ स्वीकार कर लिया है। उसने सुनील की ओर मुस्कुराकर देखा और अपना ध्यान अपनी चुदाई की ओर वापिस लौटा लिया। वो भी अब झड़ने के करीब थी।

“मैं झड़ रही हूँ... सजल...! सुनील...!” सजल के लंबे मोटे लौड़े पर उछलते हुए कोमल चींखी। अचानक वो ठहर गयी। उसकी चूत में अजीब सा संवेदन हो रहा था। सजल भी अब झड़ रहा था। वो भी चींखने लगा, “मम्मी.. मैं भी... आआआआआह!” पर उसने अपने धक्कों की रफ्तार कम न की। कोमल को यही पसंद था: उसके झड़ने के बाद भी अपनी चूत में मोटे लंड से घिसाई। “चोद मेरे लाडले.... वा..आआआआआआआआआआआआआआआ..ह!”

शाहीन और सुनील दोनों देख रहे थे कि कैसे कोमल, सिर्फ ऊँची एड़ी की सैंडल पहने बिल्कुल नंगी, अपने बेटे के लंड पर उछलती हुई झड़ रही थी। शाहीन के मन में आया कि काश उसे भी वही सुख मिले जो अभी कोमल को मिल रहा था। सुनील को भी समझ आया कि क्यों उसकी बीवी अपने बेटे से चुदवाने लगी थी। कोमल एक बार और झड़ी और निढाल हो गयी।

“काश मैं तुम्हें समझा पाती शाहीन... जो मैं इस वक्त महसूस कर रही हूँ... इसमें इतना सुख है... मैं नहीं समझा सकती।”

“इस लज़्ज़त का पूरा मज़ा लो... बोलो मत...!” शाहीन ने ठंडी साँस लेते हुए कहा।

थोड़ी देर बाद ही सजल और सुनील के लंड दोबारा तन कर खड़े हो गये। अब उन्हें फिर चुदाई की इच्छा हो रही थी। चूंकि वो अभी शाहीन को चोद कर हटा था, सुनील ने कोमल की ओर अपना रुख किया। कोमल इस समय झुक कर शाहीन की चूत चाटने में व्यस्त थी। सुनील ने पीछे से जाकर एक ही झटके में अपना पूरा लौड़ा कोमल की चूत में पेल दिया।

“ऊँओंफ्ह।” कोमल के मुँह से अजीब सी चीत्कार निकली। कई साल बाद उसके पति ने उसे इतनी बेरहमी से चोदने की कोशिश की थी। उसने अपनी कमर हिलाते हुए सुनील को उत्साहित किया, “मुझे यूँ ही बेरहमी से चोदो सुनील... मुझे खुशी है कि तुम मुझे आज ऐसे चोद रहे हो... फाड़ दो मेरी चूत...!”

शाहीन यूँ ही छूटने वालों में से तो थी नहीं। वो अपनी ऊँची ऐड़ी की सैंडल में गाँड मटकाती सजल के पास आयी और बोली, “देख अपने मम्मी-पापा की चुदाई... और मेरी चूत का भोंसड़ा बना।”

सजल आगे बढ़ा और शाहीन के ऊपर चढ़ाई कर दी। अपने लंड को उसने शाहीन की गीली चूत में पेल दिया। उसने अपने पापा को देखा जो कोमल की ताबड़तोड़ चुदाई कर रहे थे। उसकी मम्मी उन्हें और बढ़ावा दे रही थी। सजल ने तेजी से शाहीन कि चुदाई की और कुछ ही समय में दोनों का पानी छूटने लगा। उधर सुनील और कोमल का भी खेल खत्म हो गया था और दोनों लंड अपनी चूतों को पानी पिला कर शाँत हो गये थे। चारों थक भी गये थे।

शाहीन ने सबको खाना खिलाया और बीयर पिलायी और एक बार फिर सबने मिलकर चुदाई की। दोबारा फिर मिलने के वादे के साथ सिंह परिवार अपने घर चला गया।

कोमल सोने के पहले यही सोच रही थी कि अब उसके जीवन में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।

ये सोचकर वो सुनील से चिपककर सो गयी।




RE: घरेलू चुदाई समारोह - rranjan4u - 06-04-2015

Nice Story


RE: घरेलू चुदाई समारोह - rajbr1981 - 13-10-2015

कहानी के अगले भाग का इन्तेजार है



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